"सारी दुनियाँ के फेसबुक पे, रंगीन तस्वीर,एक दिन में, एक युग का आलम बताते रहे,वो अपनी खबर की कोई तस्वीर बता देती,ये सोच के हम कई बार फोन उठाते रहे l"
कब तक उसे सोचूंगा, कब तक गाऊंगा,ये मुमकिन हो,वो मेरी हो जाए तो क्या होगा,उसकी याद में पिघलता हूँ, वैसे ही रात भर,नींद से जागूंगा तो, आगोश में सो जाऊँगा l
"जो ख़त मैंने लिख के जला दिये,जो अल्फाज़ मैंने लिख के मिटा दिये,जो बात मैंने खुद से भी छिपा लिए,उनमें मेरी मोह्हबत के अहसास थे l"
थोड़ा संभल कर चलते है,थोड़ा लापरवाह हो जाते है,डरते थे जिस राह, जाने में,उसी सफ़र में खो जाते है l
"आँखे खोलने से पहले,
तुम्हें याद कर लेता हूँ,
हर सुबह कल रात सा,
थोड़ा प्यार कर लेता हूँ l"
समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे किस्से
अगली मोहब्बत में तुम्हें ये काम आयेंगे