ये अलग बात है दिखाई न दे,मगर शामिल ज़रूर होता है,खुदकुशी करने वाले का भी,कोई न कोई कातिल जरूर होता है
ये अलग बात है दिखाई न दे,
मगर शामिल ज़रूर होता है,
खुदकुशी करने वाले का भी,
कोई न कोई कातिल जरूर होता है
खूबसूरती से धोका न खाइये जनाब…
तलवार कितनी भी खूबसूरत क्यों न हो…
मांगती तो खून ही हे…
ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-करार,
बेक़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी।
“तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे...ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,उसको पढते रहे और जलाते रहे....”
इस तरह मिली वो मुझे सालों के बाद,
जैसे हक़ीक़त मिली हो ख़यालों के बाद,
मैं पूछता रहा उस से ख़तायें अपनी,
वो बहुत रोई मेरे सवालों के बाद!!