मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ…..कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है !
अब शामे खत्म तुमसे,अब सुबह शुरू तुमसे ,बचे निशा के कुछ पल,उसमे नींद भी तुमसे,सोयी आँखों के सपने भी तुमसे l
कितना रोया था मैं तेरी खातिर
अब सोचता हूँ तो हंसी आती है ..
औऱ फ़िर बिछड़ कर ये तो होना ही था ।अब समन्दर जितनी प्यास लिए फ़िरते हैं दोनों ।।
मिलेंगे आँधियाँ बहुत रास्ते में,हमें फिर भी चलना है lबहुत देर करनी है रौशनी,इसलिए थोड़ा धीरे जलना है l