मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ…..कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है !
कितना रोया था मैं तेरी खातिर
अब सोचता हूँ तो हंसी आती है ..
बस ईतनी सी उर्म के तलबदार है हम,ना मरेंगे तुझसे पहले ना जिऐँगे तेरे बाद..!!
औऱ फ़िर बिछड़ कर ये तो होना ही था ।अब समन्दर जितनी प्यास लिए फ़िरते हैं दोनों ।।
मोहब्बत ज़िन्दगी बदल देती है …..मिल जाये तब भी और ना मिले तब भी !!
"हर सुबह अंतिम और शाम आख़री हो सकती है,दो पल की ज़िंदगी, एक पल में बड़ी हो सकती है,