कोरा कागज था मन मेरा जिस
पर नाम है,था, सिर्फ और सिर्फ तेरा
ज़िन्दगी चाहे लिख रही हो काजल के गीत...!. . ख्वाब पलकों पे हमारी सुनहरे ही रहते हैं...!!
"मैं बन के बादल, कंही भी बरस जाता,तुमसे मिलके फिर,मैं कहाँ तक जाता,तय है कि नदी बन, बहना है तेरी ओर,झरना मिलने कभी, समंदर नहीं जाता l"
अब ना मैं वो हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे
फिर भी मशहूर हैं, शहरों में फ़साने मेरे
जिंदगी हैं तो नए जख्म भी लग जायेंगे
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे
आप से रोज़ मुलाक़ात की उम्मीद नहीं
अब कहा शहर में रहते हैं ठिकाने मेरे
इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है,
गम देके वो पूछे हैं कोई गम तो नहीं है,
चल मान लिया तेरा कोई दोष नहीं है,
हालांकि दलीलों में तेरी दम तो नहीं है
तुमसे ही रूठ कर तुम्ही को याद करते हैं
हमे तो ठीक से नाराज़ होना भी नही आता