सूखे पत्ते की तरह थे हम किसी ने समेटा भी तो
“निकल आते हैं आँसू गर जरा सी चूक हो जाये,
किसी की आँख में काजल लगाना खेल थोड़े ही है।”
शाम की लाली रात का काजल सुबह की तक़दीर हो तुम,
हो चलता फिरता ताजमहल सांसे लेता कश्मीर हो तुम!!
"ज़िंदगी तेरे किताब को, शायद कभी ना पढ़ पाऊँगा,एक शब्द पे ठहरता हूँ, तो दिन गुजर जाता है l"
"थक सी गई है नज़र, इंतजार में उसके,अब दिखे वो तो आँखों का रविवार हो l"
Bin tere mujko Zindagi se khauff lagta hai
Kisto Kisto mein marr raha hu aisa roz lagta hai…