पुराने इश्क को आजमाया हमने ,नए इश्क में वक़्त गवाया हमने lजब भी हुआ इश्क ..हर बार नई ताजगी का एहसास पाया हमने l
तुम क्या हो ये कुछ पता नहीं
तुम इश्कशहर हो या पूरा हिंदुस्तान हो
तु मिल गई है तो मुझ पे नाराज है खुदा,
कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है
रूठे ज़माने को एक ख़्वाब देना है,बन हौंसला,कि जमाने को नया मकाम देना है lकरना क्या होगा,मुस्कुराना और नज़र मिलाना हैज़माने को दौड़ तो अपनी खुद लगाना है l
"वो आयी नहीं वक़्त पे,एक याद बेवक़्त आती है l"
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है