रूबरू मिलने का मौका मिलता नहीं है रोज,इसलिए लफ्ज़ों से तुमको छू लिया मैंने।
रेत पर लिखी बात को लहरें मिटा देती है,वो कहती नहीं पर हर बात बता देती है lलिखती है वो खत अकेले में ,खुद पढ़ती है और फिर जला देती है l
जिनके लिए हम लिखते है ,अक्सर , उनको ही हम कुछ लिख नहीं पाते !!
बहुत बाकी रह जाना,तुम्हें खोजते-खोजते,एक दिन खुद को पा लूँगा l"
"तुमसे हुई बातें,मैं दोबारा खुद से कर जाता हूँ,फिर वही बात मैं कागज़ पे लिख जाता हूँ l"
दुनिया ने भले हमें जुदा कहा,हमने दिल से कभी ना उन्हें,अलविदा कहा l"