न जाने किस तरह का इश्क कर रहे हैं हम,
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम।
मेरी मासूम सी मुहब्बत को ये हसीं तोहफे दे गए हैं,जिंदगी बन कर आए थे.. और जिंदगी ले गए हैं!
जब भी कोई करता है तारीफ,मैं अन्दर से थोड़ा डर जाता हूँ lये एक बोझ सा लगता है कभी,ना जाने कितनी बार झूठ भी कह जाता हूँ l
ज़िक्र तेरा हर वक़्त होने लगा है ,तु मेरे रूह तक में खोने लगा है lतुम्हारी तलाश अब खत्म नहीं होती,आईने में अपनी आँखों में पाने लगा हूँ l
"कोई कह दे हर शाम कि, दिन भर तेरा इंतज़ार किया,बस इतनी सी हसरत लिए रोज घर से निकल जाता हूँ l"
तेरी झील सी आँखों में डूब जाने का दिल चाहता है,
वफ़ा पर तेरी बर्बाद हो जाने का दिल चाहता है,
कोई सम्भाले हमे, बहक रहे हैं कदम,
तेरे इश्क में मर जाने का दिल चाहता है।