कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
शांत मन समंदर कभी बहक जाता है,कुछ बूँद आँखों से छलक जाता है lबर्फ के पिघलने से सैलाब नहीं आती,आँसू से पत्थर भी पिघल जाता है l
कई बार खामोशी से बेहतर,कोई बात नही होती lनींद आ जाये आँखों में,ऐसी उनकी रात नही होती l
गुड नाईट
एक उसे पाने की,एक उसे भुलाने की,कोशिश बेकार करता हूँ l
"कतरा-कतरा रौशनी का,होके हम जल जायेंगे..हो अंधेरा कितना घना भी,भोर बनके आयेंगे.... "
हर पुरानी बात कोछोड़ने की कोशिश,नये दिन के शुरुआत में करता हूँ,हर शाम लौट के वापस,कल के शाम के पास आ जाता हूँ l