कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
जिन फूलों को संवारा था
हमने अपनी मोहब्बत से,
हुए खुशबू के काबिल तो
बस गैरों के लिए महके।
Kya pata uski zuban se bhi izhar nikle,
Kya pata unke dil me bhi pyar nikle,
Sach hai uske bina ji nahi sakte hum,
Kya pata uske dil se bhi yahi baat nikle.
एक हम हैं, जो
समझे नहीं खुद को अब तक।
और एक दुनिया है, जो
पता नहीं हमें क्या-क्या समझती है।
वतन हमारा ऐसा कोई न छोड़ पाये,रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये,दिल एक है एक है जान हमारी,हिंदुस्तान हमारा है हम इसकी शान है.