हमारी ही तमन्ना क्यों करो तुम,तुम्हारी ही तमन्ना क्यों करे हम lनहीं परवाह दुनिया को हमारी,दुनिया की परवाह क्यों करें हम l
बहुत कुछ कहना था,पर कैसे और क्या,ये समझ नहीं आया,तो हाँथ पकड़,उसने कहा 'बस',मैने भी साँसे रोक,ज़रा जोर से दबा दिया l
अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़
इरादा तो हरगिज न था तुमसे मोहब्बत का,
सच कहे तो तुम्हे देखते ही मोहब्बत हो गयी।