आज कल वो हमसे डिजिटल नफरत करते हैं,
हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं..
मेरा दिल तो जैसे है बच्चों का गुल्लक ,भरा जिसका जी वही तोड़ता है।
"सारी दुनियाँ के फेसबुक पे, रंगीन तस्वीर,एक दिन में, एक युग का आलम बताते रहे,वो अपनी खबर की कोई तस्वीर बता देती,ये सोच के हम कई बार फोन उठाते रहे l"
तुम इश्क़ करो और दर्द न हो?
मतलब दिसंबर की रात हो और सर्द न हो!
ऐसा नही की आपकी याद आती नही,ख़ता सिर्फ़ इतनी है के हम बताते नही!