नजानेकिसतरहकाइश्ककररहेहैंहम,जिसकेहोनहींसकतेउसीकेहोरहेहैंहम।
वफा क्या होती है?
काश तुम जान जाती ...
ना हम, ना तुम अकेली होती ।
मैंने जिन्दगी से पूछा..सबको इतना दर्द क्यों देती हो ?जिन्दगी ने हंसकर जवाब दिया..मैं तो सबको ख़ुशी ही देती हु,पर एक की ख़ुशी दुसरे का दर्द बन जाती है !!
वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे,हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि,हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे।
निगाहें नाज करती है फलक के आशियाने से,खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।