ना जियो धर्मं के नाम परना मरो धर्मं के नाम परइंसानियत ही है धर्मं वतन का बस जियो वतन के नाम पर..
मैं आप के बारे में सोच रहा था,
और मुझे आश्चर्य हुआ कि आप
कितनी देर तक मेरे ज़हन में थे
तब मुझे एहसास हुआ: जबसे आप
मुझे मिले, आपने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा!!
हमारे माँ – बाप हमको बचपन में शहजादों की तरह पालते हैं..लिहाज़ा…
हमारा ये फ़र्ज़ बनता है,,उनके बुढ़ापे में उनको बादशाहों की तरह रखें!
सपनो से दिल लगाने की आदत नहीं रही,
हर वक्त मुस्कुराने की आदत नहीं रही,
ये सोच के की कोई मनाने नहीं आएगा,
हमें रूठ जाने की आदत नहीं रही |
निकलो गलियों में बना कर टोली
भिगा दो आज हर एक की झोली
कोई मुस्कुरा दे तो उसे गले लगा लो
वरना निकल लो, लगा के रंग कह के हैप्पी होली