लौटा जब वो बिना जुर्म की सजा काटकर,
सारे परिन्दें रिहा कर दिए उसने घर आकर.
होठ तो खामोश रहेंगे वादा है मेरा आपसे।
निगाहें अगर कुछ कह बैठे तो,
खफा मत हो जाना।
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तड़प रहे है हम तुमसे एक अल्फाज के लिए,तोड़ दो खामोशी हमें जिन्दा रखने के लिए।
ख़फ़ा हो, गुस्सा हो और नाराज़ भी होचलो ! कोई बात नहीं,गलती मेरी है मना लूँगा lचली भी गई ग़र जो मुझे छोड़कर,ये वादा है बेवफा का इल्ज़ाम ना दूँगा l
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्तासेहैजो किसी और का होने दे न अपना रक्खे
"ग़र जुदाई से खुश हो,तो जुदाई माँग लेता,
मुझसे तेरी नासाज तबीयत ना मांगी जायेगी l"