हमें ख़बर है मोहब्बत के सब ठिकानों की….
शरीक-ए-जुर्म ना होते तो शायद मुखबरी करते!
कौन कहता है कि दोस्ती-यारी बर्बाद करती है,
कोई निभाने वाला हो तो दुनिया याद करती है!
जब कभी सिमटोगे तुम...मेरी इन बाहों में आकर मोहब्बतकी दास्तां मैं नहीं मेरी धड़कने सुनाएंगी।
मेरी इन बाहों में आकर मोहब्बत
की दास्तां मैं नहीं मेरी धड़कने सुनाएंगी।
क्या दास्तान सुनाऊं तुमको अपनी मोहब्बत कीबस मिलकर बिछड़ गया महबूब इतना जान लो
झुके बार-बार जो पत्थर के आगे,उसे गुमा होगा वो खुदा हो जायेगा lमिला रहमो पे मोह्हबत तो क्या !एक ना एक दिन वो बेवफा हो जायेगा l
कल छोड़ आऊं पीछे,आज नए सवेरे की बात होगी lपूरा दिन तो मेरा है,क्या हुआ जो फिर रात होगी l