हमने सुना है रहती है अब बेकरार वो,
छुपके किसी का करती है इंतजार वो!
टिक टिक करते घड़ियों के कांटे,
उम्र ढल रही मेरी बताते रहते है…
कौन कहता है कि दोस्ती-यारी बर्बाद करती है,
कोई निभाने वाला हो तो दुनिया याद करती है!
क्या दास्तान सुनाऊं तुमको अपनी मोहब्बत कीबस मिलकर बिछड़ गया महबूब इतना जान लो
ख़फ़ा हो, गुस्सा हो और नाराज़ भी होचलो ! कोई बात नहीं,गलती मेरी है मना लूँगा lचली भी गई ग़र जो मुझे छोड़कर,ये वादा है बेवफा का इल्ज़ाम ना दूँगा l
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्तासेहैजो किसी और का होने दे न अपना रक्खे