कोई तो है मेरे अन्दर मुझे संभाले हुए…
मैं बेकरार सा होकर भी बरकरार रहता हूं!
Tum Ek Kasam Nibhane
Se Dar„Gayi,
Mujhe Teri Kasam De Kar
Hazaro Ne Luta.
तेरे बाद कुछ यूं मोहब्बत निभाई है मैंने,
तुम नहीं कोई नहीं कसम खाई है मैंने!
डर तो इंसान का वहम है,
जो उसे यूँ ही लग जाता।
तब तक है लगता रहता,
जब तक इंसान सहमता रहता.
मेरी ख़ामोशी में सन्नाटा भी हैं और शोर भी हैं,तूने गौर से नहीं देखा, इन आखों में कुछ और भी हैं.
मेरा दिल तो जैसे है बच्चों का गुल्लक ,भरा जिसका जी वही तोड़ता है।