जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,
अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।
सुबह की चाय,घर की बालकनीतुम्हारे य़ादों का साथ खास है lयही सिलसिला है रोज का ,तुमसे ही चाय की मिठास है l
कुछ बातें इतनी गंभीर होती है,कि वो केवल मजाक में ही कि जा सकती है
"ना खुश होता हूँ, ना उदास होता हूँ,तुम नहीं होती, पर तेरे पास होता हूँ,पागलों सा भागता हूँ,तलाश में खुद के,बताता नहीं हूँ पर, इंतज़ार में होता हूँ l"
"मिले ना मिले कहीं, उसके साथ चलना है,जैसे चलती दो पटरियाँ, वैसे साथ रहना है l"
तुम्हें देखे बिना हम तो ना रह पायेंगे,नज़र चुराते है, नज़र मिलते ही आँख भर आएंगे l