एक तरफ़ा ही सही,हम इश्क निभाएंगे, ♡कभी आना हमारे शहर,माँ की हाथ की चाय पिलायेंगे। 1120
एक तरफ़ा ही सही,
हम इश्क निभाएंगे, ♡
कभी आना हमारे शहर,
“निकल आते हैं आँसू गर जरा सी चूक हो जाये,
किसी की आँख में काजल लगाना खेल थोड़े ही है।”
ज़िस्म के ज़ख्म हो तो मरहम भी लगाएं,
रूह के नासुरों का हकीम मिलता नहीं हमें!
खूबसूरत ज़िस्म हो या सौ टका ईमान…
बेचने की ठान लो तो हर तरफ बाज़ार है!
रूह ने कई बार मुझ से अकेले में कहाजी लिए हो तो चलो जिस्म बदल कर आयें
मन करता हैएक लंबी, अकेली यात्रा पर निकल जाऊँ।तब याद आता है इतने बरसों से उसी यात्रा में हूँ ।