कभी बादल, कभी बारिश, कभी उम्मीद के झरने,
तेरे अहसास ने छू कर मुझे क्या-क्या बना डाला!
" बहुत खुश चेहरे के पीछे,अक्सर उदास आँखें होती है l "
कभी कभी वक़्त के साथ सब ठीक
नहीं सब ख़तम हो जाता है...
एक उसे पाने की,एक उसे भुलाने की,कोशिश बेकार करता हूँ l
यूं तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैंमिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं
ना कोई महल, ना सपना,ना कोई फूल छोड़ जाता हूँ,तुम्हारे नाम लिखें है कई ख़त, रोज एक छोड़ आता हूँ l