गम की परछाईयाँ यार की रुसवाईयाँ,
वाह रे मुहोब्बत ! तेरे ही दर्द और तेरी ही दवाईयां।
इतनी दिलकश आँखें होने का ये मतलब तो नहीं…
कि जिसे देखो उसे दिवाना कर दो…
नन्हें हाथ ब्रश पकड़,कोई तस्वीर नहीं बनाते,एक ख़्वाब जो शब्दों सेबयां ना कर सके वो,रंगों से सजाते है l
खवाब कहाँ नज़र कहाँ
ज़िंदगी कहाँ बसर कहाँ
“दिन तेरे ख़याल में गुजर जाता हैं,
रातों को भी ख़्याल तेरा ही आता हैं,
कभी ये ख़्याल इस तरह बढ़ जाता है की,
आईने में भी तेरा ही चेहरा नज़र आता हैं.”