तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
जब भी जाता हूँ कहने,जुबाँ कुछ कँहा बोल पाता है lबस रहती है नज़र में नज़र,कहना-सुनना तो यूँ ही हो जाता है l
हम नहा भी ले तो फील नहीं आती है,तुम्हारी तो नोटबुक से भी खुशबू आती है ।
"जो मोह्हबत मुझे ना मिली,
वैसी मोह्हबत निभाऊंगा,
मुझे मिले हर झूठ के बदले,
तुम्हें सच बताता जाऊँगा l"❤
Pyar Bhari shayari
उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए,
पर्दे में रखो चेहरे को कहीं आग न लग जाए।