हूँ भीड़ में ,पर भीड़ का हिस्सा ना हो पाया lज़हन में थी तुम,कोई दूसरा किस्सा ना हो पाया l
बहुत मन से चाहा था उसने,फिर उसका मन ही ना रहा lसारी मुश्किलों में भी निकला था,उसका पता मैने..उस पते का पता फिर मुझे भी ना रहा l
"तुम में खो के मैं,खुद को पाता हूँ,यही एक सच है,मैं सब से छुपाता हूँ l"
"ये इश्क़ की अजीब बीमारी हैहर धुन से अपना राब्ता लगता हैकंही दूर, कैसी भी आवाज़ हो,आवाज़ उसने दी ऐसा लगता हो "
वक़्त का इंतज़ार कीजिये जनाब
इस बार हम नहीं आप हमसे मिलने आएंगे
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता