तू कातिल तेरा दिल कातिल, तेरे चेहरे का तिल कातिल,आइना मत देखना हम नशीं, कहीं टकरा न जाए कातिल से कातिल।
तू कातिल तेरा दिल कातिल, तेरे चेहरे का तिल कातिल,
आइना मत देखना हम नशीं, कहीं टकरा न जाए कातिल से कातिल।
किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है
"शिकायत करूं, तो नाराज़ हो जाती है,उम्मदगी में अपनी, मैं हार जाता हूँ,मोह्हबत है, और फ़िक्र भी ना आए,ऐसी जिल्लत वाली इश्क़ में मर जाता हूँ l"
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है