तुम थी,तो कम थी,ना हो, तो भरपूर हो,पता चले की तुम हो मुझमें,इसलिए,ये मौसम जरूर हो l
तबाही की तस्वीर साफ़ दिखने लगी
पानी तो पानी हवा भी बिकने लगी
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चेहरों पे दोहरी नका़ब रखते हैं
मेरी बहादुरी के किस्से कितने मशहूर थे इस शहर में,
पर तुझे खो जाने के डर ने मुझे कायर बना दिया...
उसी का शहर, वही मुद्दई, वही मुंसिफ
हमीं यकीन था, हमारा कुसूर निकलेगा
यकीन न आये तो एक बार पूछ कर देखो
जो हंस रहा है वोह ज़ख्मों से चूर निकलेगा