इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
ऐसा लगता है, हर इम्तिहाँ के लिए,
किसी ने जिन्दगी को हमारा पता दे दिया है
चाहता कौन है बेवफ़ायी करना
उसने परिवार सम्भाला होगा
यही सोच कर समझाता हूँ ख़ुदको
मजबूर होकर मुझे दिल से निकाला होगा
इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।
आपकी आहट दिल को बेकरार करती है,नज़र तलाश आपको बार-बार करती है,गिला नहीं जो हम हैं इतने दूर आपसे,हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है।
आपकी आहट दिल को बेकरार करती है,
नज़र तलाश आपको बार-बार करती है,
गिला नहीं जो हम हैं इतने दूर आपसे,
हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है।