सपने तो मेरे थे पर उनको पूरा करने का रास्ता
कोई और दिखाए जा रहा था और वो थे मेरे पापा….
नफरत बुरी है ना पालो इसे,
दिलों में खलिश है निकालो इसे,
न तेरा, न मेरा, न इसका न उसका,
ये सबका वतन है संभालो इसे.
“ऊंँचाई पर वही पहुँचते है,
जो बदला नहीं बदलाव लाने की सोच रखते है।”