हालात बुरे थे मगर रखती थी अमीर बनाकर..हम गरीब थे, ये बस हमारी माँ जानती थी...
इंसानियत तो हमने "ब्लड बैंक" से सीखी है साहब,जहाँ बोतलों पर "मजहब" नहीं लिखा जाता|
ना पूछ मेरे सब्र की इंतहा कहाँ तक हैतू सितम कर ले तेरी हसरत जहां तक है, वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी उन्हें होगी,हमे तो देखना है तू बेवफा कहा तक है....
हमारा सलाहकार कौन है ये बहुत महत्वपूर्ण है क्योकि दुर्योधन शकुनि से सलाह लेता था और अर्जुन श्रीकृष्ण से!