हद ना पूछो मेरीबेबसी की तुम..मै दर्द बयां करता हूंऔर तू हंसकर सुनती है..!
हद ना पूछो मेरी
बेबसी की तुम..
मै दर्द बयां करता हूं
और तू हंसकर सुनती है..!
जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं,
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं,
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ,
गम छुपा के हंसने वाले भी कम नहीं.
रोज़ इक ताज़ा शेऱ कहां तक लिखूं तेरे लिए,
तुझमें तो रोज़ ही एक नयी बात हुआ करती है…
Labo se tut gaye guftagu ke sab rishte
wo dekhta hei to bas dekhta hi rahta hei..
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..