जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं,
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं,
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ,
गम छुपा के हंसने वाले भी कम नहीं.
तूने रुख से नक़ाब क्या उठाया,
कम्बखत दिल मुँह को होने लगा,
शर्मा कर , सितारे हैं छुपने लगे,
महताब बादलों से जो निकलने लगा
मेरी बहादुरी के किस्से कितने मशहूर थे इस शहर में,
पर तुझे खो जाने के डर ने मुझे कायर बना दिया...
“देर रत जब किसी की याद सताए,
ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाये.
कर लो आंखे बंद और सो जाओ क्या पता,
जिसका है ख्याल वो खवाबों में आ जाये.”
मार्टिन लूथर ने कहा था…“अगर तुम उड़ नहीं सकते तो, दौड़ो !अगर तुम दौड़ नहीं सकते तो, चलो !अगर तुम चल नहीं सकते तो, रेंगो !पर आगे बढ़ते रहो !”एक बिहारी (खैनी ठोकते हुए):ऊ.. सब त ठीक बा.. लूथर भाई…लेकिन.. मरदे.. ई बताबा कि ..जाए के कहाँ बा…