एहसान करो तो दुआओ में मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर
इतनी ख़ामोशी क्यों ….?
बस इतना ही तो पूछा था-
“कभी वफ़ा की किसी से…
फिर वही फ़साना अफ़साना सुनाती हो
दिल के पास हूँ कह कर दिल जलती हो
बेक़रार है आतिश इ नज़र से मिलने को
तो फिर क्यों नहीं प्यार जताती हो…!!
“देर रत जब किसी की याद सताए,
ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाये.
कर लो आंखे बंद और सो जाओ क्या पता,
जिसका है ख्याल वो खवाबों में आ जाये.”
आहिस्ता आहिस्ता कीजिये कत्ल मेरे अरमानों का……
कहीं सपनों से लोगों का ऐतबार ना उठ जाए..
मनुष्य को चाहिए कि दुराचारी, कुदृष्टि वाले, बुरे स्थान में रहने वाले और दुर्जन मनुष्य के साथ मित्रता न करें,
क्योंकि इनके साथ मित्रता करने वाला मनुष्य शीघ्र ही नष्ट हो जाता है....!!!
Yaad rahega ye dour- E hayaat humko
Ki tarse the zindgi me zindgi ke liye