तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
जानते हैं... कि दिन गुलाब का है...लेकिन ज़रा देखना... दूसरे फूल उदास ना हों....
जब भी जाता हूँ कहने,जुबाँ कुछ कँहा बोल पाता है lबस रहती है नज़र में नज़र,कहना-सुनना तो यूँ ही हो जाता है l
हम नहा भी ले तो फील नहीं आती है,तुम्हारी तो नोटबुक से भी खुशबू आती है ।
"मेरे यादों में आती रही रात भर,सोते-सोते जगाती रही रात भर,किससे कहता और मैं क्या बोलता,हँसत-हँसते रुलाती रही रात भर l"
Pyar Bhari shayari