भोली सी अदा कोई फिर इश्क की जिद पर है,फिर आग का दरिया है और डूब के जाना है।
जो दिखा तुम्हारी आँखों में अश्क ,ये दर्द थोड़ा जादा बढ़ गया lहो गया फिर से तुमसे इश्क ,ये दिल फिर से नया हो गया l
बेतहाशा इश्क जो तुमसे करने लगे है,यही वजह है की और तन्हा रहने लगे है lपर तन्हाई में भी तन्हा नहीं हूँ मैं,मेरे साथ मेरा यारा,हमेशा रहने लगा है l
बीत रहा सावन बिन तेरे संग,बरस रहा बादल आसुंओ के रंग lआओ के जागे की मन में नये उमंग,हाय! ये सावन, हाय!दिल की जंग l
"कैसे कहे कितनी मोह्हबत है,लफ्ज़ कम पड़ जाते है l"
"आँखें खोलते ही ज़िंदगी,
दहशत में नज़र आ रही है,
ना जाने कितनी गलतियों का,
हिसाब एक साथ चुका रही है l"