बुरे कर्म करने नहीं पड़ते हो जाते है,
और अच्छे कर्म होते नहीं करने पड़ते हैं।
“सच्चा प्यार” की यही पहचान है,
कितना भी “लड़ झगड़” ले,
एक दूसरे से “रूत जाए फिर भी,
एक दूसरे की “जान” होते है।
ज़िक्र तेरा हर वक़्त होने लगा है ,तु मेरे रूह तक में खोने लगा है lतुम्हारी तलाश अब खत्म नहीं होती,आईने में अपनी आँखों में पाने लगा हूँ l
तमन्ना करते हो जिन खुशियों की,
दुआ है वह खुशिया आपके कदमो मे हो,
खुदा आपको वह सब हक़ीक़त मे दे,
जो कुछ आपके सपनो में हो..!!
हम से क्या हो सका मोहब्बत में
ख़ैर तुम ने तो बेवफ़ाई की