ऐ हवा तू ये जुर्म ना करा कर,
तू उसे यूँ छूआ ना कर….
बुरे कर्म करने नहीं पड़ते हो जाते है,
और अच्छे कर्म होते नहीं करने पड़ते हैं।
उनकी पलकों से शुरू हुयी दास्तान-ए-मुहब्बत,
जिनका झुकना भी क़यामत, जिनका उठना ही क़यामत. .!!
“सच्चा प्यार” की यही पहचान है,
कितना भी “लड़ झगड़” ले,
एक दूसरे से “रूत जाए फिर भी,
एक दूसरे की “जान” होते है।
कल बुरा था,तो कल भी हो..जरुरी तो नहीं,दो रातों के बीच तो,हमेशा उजाला होता है l
देखो फिर से रात आ गयी गूड नाईट कहने की बात याद आ गयी
बैठे थे गुम सुम होकर चाँद को देखा तो तुम्हारी याद आ गयी ।
शुभ रात्रि