बुरे कर्म करने नहीं पड़ते हो जाते है,
और अच्छे कर्म होते नहीं करने पड़ते हैं।
नफरत को मोहब्बत की आँखों में देखा,
बेरुखी को उनकी अदाओं में देखा,
आँखें नम हुईं और मैं रो पड़ा…
जब अपने को गैरों की बाहों में देखा।
गुज़र जायेगी ज़िन्दगी उसके बगैर भी,
वो हसरत-ए-ज़िन्दगी है ….
शर्त-ए-ज़िन्दगी तो नहीं……!!
होता है होश तो तुम नही रहतेहोते हो तुम तो होश नही रहता !!
होता है होश तो तुम नही रहते
होते हो तुम तो होश नही रहता !!
खुदा करे वो मोहब्बत जो तेरे नाम से है,
हजार साल गुजरने पे भी जवान ही रहे।