औकात नहीं थी ज़माने में जो मेरी कीमत लगा सके,
कम्बख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ्त में नीलाम हो गये।
कांटे किसी के हक में किसी को गुलो-समर,
क्या खूब एहतमाम-ए-गुलिस्ताँ है आजकल।
दिल चीर जाते हैं... ये अल्फाज उनके...वो जब कहते हैं हम कभी एक नहीं हो सकते।
दिल चीर जाते हैं... ये अल्फाज उनके...
वो जब कहते हैं हम कभी एक नहीं हो सकते।
लफ्ज़ो को तो दुनिया समझती हैकाश कोई ख़ामोशी भी समझता।
पूरी रात जाग वो मेरा बाहर इंतजार कर रही थी ,पगली ! मैं तेरे भीतर बैठा तेरा राह ताक रहा था l