हमने सुना है रहती है अब बेकरार वो,
छुपके किसी का करती है इंतजार वो!
चाय सा इश्क़ किया है तुमसेसुबह शाम न मिले तो सिरदर्द सा करता है
चाय सा इश्क़ किया है तुमसे
सुबह शाम न मिले तो सिरदर्द सा करता है
कितना भी कह लूँ,कुछ बाकी रह जाता है lकितना भी पी लूँ,बिन साक़ी अधूरा रह जाता है l
सुबह है नयी.. नया है सवेरा,
सूरज की किरण और हवाओं का बसेरा,
खुले आसमान मे “सूरज” का चेहरा,
मुबारक हो आपको ये हसीन सवेरा..!!