फिर लगेगी नजर उस पगली को,
देखो आज वो फिर से काजल लगाना भूल गई।
एक सवाल पूछती है मेरी आत्मा अक्सर, मैने दिल लगाया या जिन्दगी दांव पर!
एक सवाल पूछती है मेरी आत्मा अक्सर,
मैने दिल लगाया या जिन्दगी दांव पर!
उन्होंने ज़ुल्फें क्या झटकी अपनी,
सारे शहर में बारिश हो गई!!
औऱ फ़िर बिछड़ कर ये तो होना ही था ।अब समन्दर जितनी प्यास लिए फ़िरते हैं दोनों ।।
अभी कुछ वक़्त और ठहराना होगा,पिघलने से पहले और तपना होगा l