कागज पे मैंने अपने सब शौक हैं उतारे,ख़्वाबों को जी लिया, शब्दों के हैं सहारे lरंगीन दुनिया में, बे-रंग फिरते है मारे,तस्वीर में जो रंग थे, मैं पी गया वो सारे l
दिल से निकली दुआ हमारी
अपने इन् हाथों की लकीरों
को क्या देखता हो?
किस्मत तो उनकी भी होती है
जिनके हाथ नहीं होते…
तकदीर के हाथों खुद को में जोड़ना नहीं चाहता,
मेरे दो हाथो का होसला में तोडना नहीं चाहता,
मौसम की तरह बदल जाती ये हाथो की लकीरें,
बंद मुट्ठी मेरी हरगिज़ मैं खोलना नहीं चाहता।
ऐसा नहीं था कि इस दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी
लेकिन इन हाथों में तेरे नाम की लकीर ही नहीं थी