श्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है,बोल तेरी मीठी घायल कर जाती है lवो गोरे होते तो क्या होते,सांवले रंग पे ही दुनिया मर जाती है l
तेरे होने से बोलने लगी थी दीवारें भी,हँसी निकलने लगी थी हर कोने से भी lअब ये आलम है की,मैं भी चुप हूँ,और सब खामोश है l
"एक दिन किसी मोड़ पे,अपनी मोह्हबत में लिपटा पाओगी,जो आज तुम ठुकरा रही,उसी लिबास में वापस आओगी l"
खुदा करे वो मोहब्बत जो तेरे नाम से है,
हजार साल गुजरने पे भी जवान ही रहे।
आपकी यादें भी हैं, मेरे बचपन के खिलौनो जैसी ..
तन्हा होते हैं तो इन्हें ले कर बैठ जाते हैं…!