रूबरू मिलने का मौका मिलता नहीं है रोज,इसलिए लफ्ज़ों से तुमको छू लिया मैंने।
कल शाम की अंतिम मुलाकत ,
और सुबह तुमसे बात अच्छा लगता है l
हर बार तुमसे मिलना ,
पहली बार लगता है l
उसकी कश्ती डूब गयी समंदर में कहीं,माँझी जो बच गया बदनाम सारे जहाँ में हो गया...!
"बात किसी से भी हो, बातों में तुम ही होती हो,राह कोई भी हो, हमसफ़र तुम ही होते हो,खुद से भी बातें करता हूँ, हर पल तुम्हारी,सो जाऊँ तो भी , ख़्वाबों में तुम ही होती हो l"
जाड़े की रुत है नई तन पर नीली शाल
तेरे साथ अच्छी लगी सर्दी अब के साल...
उनके लिए जब हमने भटकना छोड़ दिया,
याद में उनकी जब तड़पना छोड़ दिया,
वो रोये बहुत आकर तब हमारे पास,
जब हमारे दिल ने धडकना छोड़ दिया