Best gulzar shayari
मेरी फ़ितरत में नहीं था तमाशा करना,
बहुत कुछ जानते थे मगर ख़ामोश रहे…
रेत पर लिखी बात को लहरें मिटा देती है,वो कहती नहीं पर हर बात बता देती है lलिखती है वो खत अकेले में ,खुद पढ़ती है और फिर जला देती है l
ऐसा नही की आपकी याद आती नही,ख़ता सिर्फ़ इतनी है के हम बताते नही!
इंसानी जिस्म में सैंकड़ों हैवान देखे हैं,
मैंने दिल में रंजिश रख महफ़िल में आये मेहमान देखे हैं|”
क्लास में आख़िरी बेन्च पर जो कुरेद कर तुम्हारा नाम लिखा था,
ज़िन्दगी की सब से लम्बी कहानी वही तो थी ….