पता नहीं कितना अंधकार था मुझमें,मैं सारी उम्र चमकने की कोशिश में बीत गया ।
बातें मेरी उन्हें समझ नहीं आती,हर बात, बातों में समझाई नहीं जाती lआँखें बंद कर क्यों नहीं सुनती दिल की,दिल की बातों में दिमाग़ लगाई नहीं जाती l
"सारी दुनियाँ के फेसबुक पे, रंगीन तस्वीर,एक दिन में, एक युग का आलम बताते रहे,वो अपनी खबर की कोई तस्वीर बता देती,ये सोच के हम कई बार फोन उठाते रहे l"
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……
रोज़ इक ताज़ा शेऱ कहां तक लिखूं तेरे लिए,
तुझमें तो रोज़ ही एक नयी बात हुआ करती है…
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..