मुस्कुरा के देखो तो सारा जहॉ रंगीन है…वरना भीगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है..
मुस्कुरा के देखो तो सारा जहॉ रंगीन है…
वरना भीगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है..
"मैं बन के बादल, कंही भी बरस जाता,तुमसे मिलके फिर,मैं कहाँ तक जाता,तय है कि नदी बन, बहना है तेरी ओर,झरना मिलने कभी, समंदर नहीं जाता l"