रिहा कर ख़ूबसूरत दिखने की चाहत से मुझे..ऐ आईने तू मेरी सादगी को ज़मानत दे दे
रिहा कर ख़ूबसूरत दिखने की चाहत से मुझे..
ऐ आईने तू मेरी सादगी को ज़मानत दे दे
जब भरोषा टूट जाता है तब sorry,
का कोई मतलब नहीं होता...!!
सुबह की चाय,घर की बालकनीतुम्हारे य़ादों का साथ खास है lयही सिलसिला है रोज का ,तुमसे ही चाय की मिठास है l
तेरे खामोश होंठों पर मोहब्बत गुनगुनाती है,तू मेरा है मैं तेरा हूँ बस यही आवाज़ आती है।
"ना खुश होता हूँ, ना उदास होता हूँ,तुम नहीं होती, पर तेरे पास होता हूँ,पागलों सा भागता हूँ,तलाश में खुद के,बताता नहीं हूँ पर, इंतज़ार में होता हूँ l"
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की……!!
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं….!!