जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,
अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।
बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है
"नाराजगीं की उम्र बस इतनी है जाना,इधर तुमने हाथ पकड़ा, उधर मैं माना l"
ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तिरी तस्वीर लिए बैठा हूँ
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की……!!
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं….!!