"जैसे बहती नदी, किनारों पे निशान छोड़ जाती है,जुगनू अँधेरे में अपनी, अलग पहचान छोड़ जाती है,कभी गुजरती है रेल पुल पे, मुझे सुनाई नहीं देता,तुम्हारे साथ होकर, ज़िंदगी पहचान छोड़ जाती है l"
"मैंने खुद को,उसमें खो दिया,फिर मैंने उसे खो दिया l"
उसे गजब का शौंक है हरियाली का,
रोज आकर मेरे जख्मों को हरा कर जाता है.
तुझे चाहता रहा मै इस कदर,
के दुनिया व् भुला बैठा,
तेरी एक हसी के बदले,
अपनी ज़िन्दगी भुला बैठा
निकलते है तेरे आशिया के आगे से,
सोचते है की तेरा दीदार हो जायेगा,
खिड़की से तेरी सूरत न सही
तेरा साया तो नजर आएगा…!!
ना चाँद की चाहत
ना सितारों की फरमाइश
हर जन्म में तू मिले
मेरी बस यही ख्वाहिश