लोग चले है जन्नत को पाने की खातिर,
बेख़बरो को खबर कर दो माँ घर पर ही है.
रूह मुझे दो, जिस्म भले ही उसे देदो।
जिस्म तो खो दोगे जनाब, फिर भी रूह तो महफ़ूज़ होगी हमारे पास।
लफ्जों की तरह तुझे किताबों में मिलेंगे
बन के महक तुझे गुलाबों में मिलेंगे,
खुद को कभी अकेला मत समझना,
हम तुझे तेरे दिल में या तेरे ख्यालों में मिलेंगे.
सूरज रज़ाई ओढ़ के सोया तमाम रात
सर्दी से इक परिंदा दरीचे में मर गया