उनके सुर्ख लब और वफा की कसम,
हाय क्या कसम थी खुदा की कसम!
तुम्हारे साथ ही हर ग़म से सुकून पाते है,कभी तुम ही मेरे लिए ग़म बन जाते हो lउम्मीदगी की राहो से ही,रौशन है रिश्ते,जिंदा हूँ तो हँसता-रोता सब नज़र आने दो l
"वो कागज़ और मैं, कलम सा लगता हूँ,उसे मिलने के बहाने, रोज लिखता हूँ,स्याह मोह्हबत का,कागज़ चुम लेता है,कोई गज़ल फिर, उसके नाम कर देता हूँ l"
कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,
कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।
Bin tere mujko Zindagi se khauff lagta hai
Kisto Kisto mein marr raha hu aisa roz lagta hai…