तोड़ दो ना वो कसम जो तुमने खाई है,
कभी कभी याद कर लेने में क्या बुराई है!
जहाँ कमरे में कैद हो जाती है ज़िन्दगी,लोग उसको बड़ा शहर कहते हैं ।
भीड़ में अकेला रह जाता हूँ,तेरी याद में ऐसे खो जाता हूँ l
"मेरे कंधे पे सर रख तू खुद में खो सके,
तेरे कंधे पे सर रख मैं कभी रो सकूँ l"
तो तलाश आज दोनों की ख़त्म हुई.....❤💕
आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते,
होठों से हम कुछ कह नहीं सकते,
कैसे बयाँ करे हम आपको ये दिल-ए-हाल,
की तुम ही हो जिसके बैगेर हम रह नहीं सकते.
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर,
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है…….
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते।